कानपुर : 1 लाख 32 हजार किलोमीटर ट्रैक की सुरक्षा की बड़ी चुनौती…सिर्फ स्टेशनों के आस पास कीही सुरक्षा कड़ी रहती है

By Sanvaad News

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कानपुर, संवाद पत्र । बीते कुछ महीनों में कानपुर समेत कई स्थानों पर जिस तरह ट्रेनों को पलटाने की साजिश की गई है, उससे ये तय हो गया है कि पूरे देश में फैले 1 लाख 32 हजार, 310 किमी ट्रैक की सुरक्षा इतना आसान नहीं है। रेलवे प्रतिदिन 14 किमी नया ट्रैक कहीं न कहीं बिछाता रहता है। रेलवे ट्रैक की सुरक्षा स्टेशनों के पास ही कड़ी होती है, बाकी जगह लचर ही रहती है।

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रेलवे ने मानक तय कर रखा है कि कितने किमी तक कितने गैंगमैन होंगे, कितनी दूर तक आरपीएफ का सिपाही ट्रैक पर गश्त करेगा और कितने किमी तक रेल पथ निरीक्षक ट्रैक की देखभाल करेंगे। इस लिहाज से जितने गैंगमैन, आरपीएफ जवान और रेल पथ निरीक्षक होने चाहिए, वह नहीं हैं। बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।

किसका क्या काम

गैंगमैन: रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी गैंगमैन होता है जो लगभग 10 किमी तक हथौड़ा और रिंच लेकर चलता है। गैंगमैन ट्रैक को मजबूत करने के लिए लगाई गई क्लिपें व स्लीपर की देखरेख करता है। ट्रेनों के चलने से क्लिप 5 एमएम ढीली होती रहती है जिसे हथौड़ा के माध्यम से गैंगमैन टाइट करता है। 

यदि कोई बड़ा फाल्ट है तो वह रेल पथ निरीक्षक को इसकी सूचना देता है। जिस प्रकार तेजी से रेल मंत्रालय ट्रैक का विस्तार कर रहा है और गैंगमैन रिटायर हो रहे हैं, उससे ट्रैक बढ़ रहा है और गैंगमैन घट रहे हैं।
 
आरपीएफ: आरपीएफ यानी रेलवे सुरक्षा बल का काम रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा व देखभाल करना है। देश में जब आतंकी गतिविधियां बढ़ीं थीं तो आरपीएफ को ट्रैक पर गश्त के लिए लगाया गया था। इन्हें क्षेत्र आवंटित कर दिया जाता है और आरपीएफ जवान 24 घंटे गश्त करते हैं।  

रेल पथ निरीक्षक: पीडब्लूआई यानी रेल पथ निरीक्षक का काम ट्रैक की देखभाल करना होता है। जिस रूट पर ट्रेनें कम चलती हैं, वहां ये निरीक्षक ट्राली के सहारे गश्त करते हैं लेकिन कानपुर-दिल्ली, कानपुर-हावड़ा जैसे मुख्य रेलमार्ग पर ट्राली से गश्त करना संभव नहीं है क्योंकि इस रूट पर प्रतिदिन 3 मिनट पर एक ट्रेन चलती है और इन ट्रेनों की स्पीड 130 किमी प्रति घंटा तक होती है।

जीआरपी: रेलवे में यदि कोई क्राइम होता है तो जीआरपी इस मामले को देखती है। यदि ट्रेन में जहरखुरानी हो जाए, यात्रियों में मारपीट हो जाए, धरना प्रदर्शन होने लगे, कोई ट्रेन रोकने की कोशिश करे तो ऐसे मामलों में जीआरपी सक्रिय हो जाती है। 
क्या बोले अधिकारी

रेलवे ने गैंगमैन, ट्रैकमैन, रेल पथ निरीक्षक, आरपीएफ के क्षेत्र बांट रखे हैं, सुरक्षा के लिहाज से सब अपना अपना काम करते हैं। ट्रैक की सुरक्षा में कोई कमी नहीं है, 24 घंटे ट्रैक की सुरक्षा होती है।- संतोष त्रिपाठी, सहायक वाणिज्य प्रबंधक, कानपुर सेंट्रल

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