लखनऊ, संवादपत्र : आज के समय पर हर किसी को अपना स्पेस चाहिए। इसकी वजह से जहां पहले लोग हंसी खुशी एक ज्वाइंट फैमली में रहा करते थे। अब फैमली छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गई है और न्यूक्लियर फैमली में तबदील हो रही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के एक शोध से पता चला है कि एकल परिवार में किशोर अधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हुए हैं। इनको सुधारने के लिए मर्म और भाव को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
मनोविज्ञान विभाग की डॉ. मानिनी श्रीवास्तव का कहना है कि 15 से 19 वर्ष के किशोरों पर किया गया शोध है। शोध में शामिल किशोरों की संख्या 475 के करीब है। अलग- अलग स्तर से की गई बातचीत से पता चला है कि एकल परिवार में रहने वाले किशोरों की संख्या 60% के करीब आक्रामकता लिये हुए है। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो वर्ष 2030 तक ये बड़ी समस्या बनकर उभरेगी। इनके उपचार के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों की आवश्यकता होती है। इसमें सबसे अधिक भावनाओं पर नियंत्रण करना पाया गया।
संयुक्त परिवार में रहने पर जोर
डॉ. मानिनी का मानना है कि एकल परिवार के स्थान पर संयुक्त परिवार में बच्चों के बीच इस तरह की मनोस्थिति कम बनती है। ऐसे में उन्होंने अभिभावकों से संयुक्त परिवार के साथ रहने की अपील की है। बताया कि इससे किशोरों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।
स्कूल-कॉलेज में भावात्मक संबंध आवश्यक
डॉ. मानिनी श्रीवास्तव का कहना है कि स्कूलों और कॉलेजों में भावनात्मक आदान-प्रदान के को लेकर सहकर्मी समूह स्थापित किया जाना आवश्यक है। किशोरों को दिया जाना प्रशिक्षण स्वस्थ शिक्षण वातावरण के विकास को बढ़ावा दे सकता है।
परवरिश में आती है परेशानियां
एकल परिवारों में बच्चों को ज्वाइंट फैमली जैसा सुख नहीं मिल पाता है। कई बार लोगों को लगता है कि ज्वाइंट फैमिली में एडजस्ट करना काफी परेशानी भरा होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। ज्वाइंट फैमिली में लोग हर कंडीशन में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते है। छोटी सी खुशी का मौका भी एक त्योहार की तरह हो जाता है। ज्वाइंट फैमिली में रहने से लोग मेंटली और फिजिकली फिट रहते हैं। लोग ज्यादा खुश होकर अपनी लाइफ बिताते हैं।
ज्वाइंट फैमिली में रहने से हर जिम्मेदारियां साझा हो जाती है. जहां अकेले रहने पर हर काम खुद ही करना पड़ता है. कई बार कई सारे प्रेशर एक साथ आ जाते है, लेकिन परिवार के साथ इस प्रेशर का एहसास नहीं होता है. घर के छोटे-बड़े कामों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है. अपनी हर बात हर किसी से फ्री होकर हर किसी से कर सकते हैं. इसके अलावा लोगों में सोशल कनेक्टिविटी भी बढ़ती रहती है.
बच्चों की होती है बेहतरीन परवरिश
ज्वाइंट फैमिली में बच्चों की परवरिश भी बेहतर होत है. बच्चों के लिए घर में दादा-दादी, चाचा-चाची, भाई-बहनों का साथ जरूरी होता है। उन्हें बचपन से ही ऐसी कई अच्छी और जरूरी चीजे सिखाई जाती है। ज्वाइंट फैमिली में रहने की वजह से बच्चों को हर तरह के गलत और सही को देखने में मदद मिलती है। बच्चे ज्यादा संस्कारी और बड़ों की रिस्पेक्ट करने वाले होते हैं। बच्चों को कभी भी अकेलेपन का एहसास नहीं होता है, जो उन्हें न्यूक्लियर फैमिली में नहीं मिलता। इसके अलावा बच्चों की कम्यूनिकेशन स्किल बेहतर होती है।
भाई-बहनों या अन्य बच्चों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की अधिक संभावना नहीं होती। यह उनका सामाजिक विकास रोक सकता है। वे संघर्ष को सुलझाने, दोस्ती करने और सामाजिक कौशल विकसित करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।













